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India: Statements by Indian Peoples’ Theatre Association and Progressive Writers’ Association on trumped-up charges by Chhattisgarh Police against Social, Cultural and Political Activists

8 November 2016

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sacw.net - 8 November 2016

Continuing with the increasing state suppression of voices of dissent and for justice, the Chhattisgarh police has filed a false case against Prof. Nandini Sunder (DU), Prof. Archana Prasad (JNU), Vineet Tiwari (CPI and IPTA), Sanjay Parate (CPM), Manju Kawasi and Mangal Ram Karma charging them with the murder of Saamnaath Baghel, a coordinator of an illegal group similar to Salwa Judum. The police had also burned the effigies of these activists earlier when they had exposed the police atrocities, including rape, on adiwasi women in Chhatisgarh. In the light of the recent CBI probe, initiated in response to a petition by Prof. Nandini Sunder, finding the Chhattisgarh police guilty of burning the adivasi villages, these charges are certainly a tactics of revenge and harassment by police. IPTA and PWA strongly condemn such misuse of office and authority by Chhattisgarh police and initimidation of the voices demanding justice for people of Chhatisgarh. We demand that these charges are revoked immediately and disciplinary actions are taken against the police officers guilty of undermining the ethics of police force.

SD/-

Rakesh, National General Secretary, IPTA, +91-9580454601

Rajendra Rajan, National General Secretary, PWA

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सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा लगाये गए झूठे आरोपों के विरुद्ध भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) और प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) का संयुक्त बयान

प्रतिरोध और न्याय के लिए उठने वाली आवाजों पर राज्य के बढ़ते दमन के क्रम में छत्तीसगढ़ पुलिस ने प्रोफ़ेसर नंदिनी सुन्दर (डीयू), प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद (जेएनयू), विनीत तिवारी (सीपीआई एवं इप्टा), संजय पराते (सीपीएम), मंजू कवासी और मंगल राम कर्मा के खिलाफ सलवा जुडूम की तरह काम कर रहे एक ग़ैरकानूनी समूह के संयोजक सामनाथ बघेल की हत्या का झूठा मुक़दमा दर्ज किया है.

गौरतलब है कि ये वही लोग हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस की बर्बरता का सच सामने लाने में अहम् भूमिका निभाई है. कुछ समय पहले जब इन कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में आमजन पर पुलिस के अत्याचार को उजागर किया था, जिसमें आदिवासी महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा बलात्कार की घटनाएँ भी सामने आईं थीं, तब छत्तीसगढ़ पुलिस ने इनके पुतले जलाये थे. पिछले महीने ही सीबीआई ने नंदिनी सुंदर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी, जिससे मुताबिक साल 2011 में ताड़मेटला गांव में विशेष पुलिस अधिकारियों ने 252 आदिवासियों के घर जला दिए थे. इसके अलावा पुलिस द्वारा आदिवासियों की हत्या और महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं को अंजाम देने के मामले भी इस रिपोर्ट में सामने आये थे.
इन घटनाओं के प्रकाश में साफ़ दिखाई देता है कि पुलिस द्वारा इन कार्यकर्ताओं पर लगाये गए यह तमाम आरोप बदले की भावना से उठाया गया क़दम है.

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) और प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा अपने अधिकारों के इस तरह दुरूपयोग और छातीसगढ़ की जनता के लिए न्याय की मांग करने वाली आवाजों को भयाक्रांत करने के इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं. हम मांग करते हैं कि इन कार्यकर्ताओं पर लगाये गए सभी आरोप अविलम्ब हटाये जाएँ और पुलिस प्रशासन की आचार-नीति को धूमिल करने व उसके खिलाफ काम करने के दोषी पुलिस अधिकारीयों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.

राकेश, राष्ट्रीय महासचिव, इप्टा. +91-9580454601

राजेन्द्र राजन, राष्ट्रीय महासचिव, प्रलेस.