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गौरक्षा के नाम पर राजस्थान प्रदेश में दूसरी हत्या - पीयूसीएल राजस्थान द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री को मेमो

7 April

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PEOPLE’S UNION FOR CIVIL LIBERTIES
RAJASTHAN

जयपुर, 6.4.2017

ज्ञापन

श्रीमती वसुंधरा राजे,
मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार,
जयपुर।

विषय गौरक्षक के नाम पर राजस्थान प्रदेश में दूसरी हत्या।

1 अप्रैल, 2017 55 वर्षीय पेहलू खान पुत्र मोहमडा और साथ ही अज़मत पुत्र सुलेमान खान 2 गाय, 3 बछडे के साथ रामगढ़ हटवाड़ा से गाय खरीद कर, 700/-रूपये में जयपुर नगर निगम से रवन्ना चालान कटवा कर अपने गांव जयसिंगपुर, नूह तहसील, मेवात जिला, हरियाणा, हाईवे एन.एच.8 से टाटा पीकअप में ले जा रहे थे। उनके पीछे के ट्रक में उनके पुत्र इर्शाद व आरीफ एवं साथ में रफीक पुत्र महतु 6 गाय व बछड़ो को लेकर जा रहे थे। शाम 6.30 बजे शनिवार शाम को राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर बहरोड़ और अलवर के बीच लगभग 200 से अधिक गौरक्षक जिनका नेतृत्व हुकुम चन्द, जगमल, ओमप्रकाश, सुधीर, राहुल सैनी, नविन सैनी इत्यादि ने दोनों गाडियों पर हमला किया। उनकी न केवल गाडिया तोडी गई बल्कि उन्हें घसीट कर गाडियों से निकाल कर मारा गया उन पर लाठियों और पत्थरों से प्रहार किया। 20-30 मिनिटों के बाद ही पुलिस हरकत में आई। तब तक पेहलू खान लगभग मूर्छित हो चुके थे’, जिसके विडियों सलग्न है। बहुत ही अफसोस की बात है कि यह सारी कार्यवाही पुलिस की देखरेख में हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग की ग’त व हाॅमगार्ड की मौजूदगी में यह सब हुआ।

बुरी तरह घायल पेहलू खान व अज़मत खान व घायल इर्शाद खान, आरिफ व रफीक खान को केन्द्रिय संस्कृति मंत्री डाॅ. महेश शर्मा द्वारा स्थापित व बेहरोड स्थित कैलाश अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 4 दिन तक पेहलू खान की सुध ना पुलिस ना प्रशासन ने ली और ना ही उसे जयपुर या गुडगांव में मल्टी स्पे’शीयलटी अस्पताल में ले जाया गया और ना ही गौ रक्षको रूपी कातीलो व हत्यारो को पकड़ने की कोई कोशिश की गई।

2 एफ.आई.आर. भी इन 5 के विरूद्ध की गई जिसमे उन्हें राजस्थान गौवंशीय पशु (वध का प्रतिरोध, अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 5 व 8 के उल्लंघन की, कि उन्होंने सक्षम अधिकारी यानी कलेक्टर से गायों और बछड़ो को राज्य के बाहर ले जाने का परमिट नहीं लिया। गौ रक्षकों ने उन पर गायों की हत्या के उद्दे’य से तस्करी करने का तथाकथित आरोप लगाया। दामोदर सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा उनके विरूद्ध लिखाई गई शिकायत में उन पर पशुओं का मारने का उद्दे’य से ले जाने का आरोप लगाया गया था व उस के आधार पर पुलिस ने यह एफ.आई.आर. दर्ज की। एफ.आई.आर. में यह दर्ज किया गया कि खान और अन्य के पास पशु खरीदने की कोई रसीद या अन्य दस्तावेज नहीं थे।
लेकिन पेहलू खान के परिवार ने पुलिस को गायें खरीद की 45000/-रूपये की रसीद दी साथ ही जयपुर नगर निगम (सीरियल नं. 89942 दिनांक 1 अप्रेल 2017) की सील वाली एक रसीद भी दी।

पेहलू खान की तरफ से जो एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई उसमें गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद केवल धारा 323, 143, 341, 147, 379 (मारपीट, चोरी व धरपकड करना) सभी जमानती धाराये व 308 (बिना नियत हमला होने पर मारने की कोशिश) लगाई। पांचो लोगों के पर्स और मोबाईल फोन भी लूट लिये गये। पेहलू खान के पुत्र इर्शाद के अनुसार उसके पास लगभग 75000/-रूपये थे और एक अन्य साथी ने 35000/-रूपये खोये।

4 अप्रेल 2017 को जब पेहलू खान मर गया तब जाकर प्रशासन व पुलिस हरकत में आई और भा.द.स. की धारा 302 की धारा लगाई, लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया और 5 अप्रेल की दोपहर को एस.पी. रवि प्रकाश पहुंचे व शाम को 2 लोगों को गिरफ्तार किया। नामजद लोगों को आज भी गिरफ्तार नहीं किया गया कि यह कहते हुये कि पेहलू खान बाहरी व्यक्ति होते हुये कैसे नामजद एफ.आई.आर. दर्ज करवा ली। उसके द्वारा दिये गये नामो को पुलिस संदिग्द्ध मान रही है।
अजमद खान अभी गंभीर हालत में नूह हरियाणा के सरकारी अस्पताल में भर्ती है। राजस्थान सरकार की तरफ से उसे बचाने के लिए कोई भी कवायद नहीं की जा रही हैं।
बहुत ही अफसोस की बात है कि गृहमंत्री गुलाब चन्द कटारिया ने इस पूरे हादसे में पेहलू खान व उनके परिवारजन के मथे ही दोष मड दिया यह कहते हुये गलती उनकी थी, ‘‘गौरक्षक’’ तो गाय बचाने का अच्छा काम कर रहे थे पर उन्हें इतनी बुरी तरिके से नहीं मारना था व कानून अपने हाथ में नहीं लेना था।

महोदया,

  • क्या राजस्थान राज्य में अब गौरक्षक के नाम पर हत्यारो द्वारा कानून व्यवस्था संभाली जायेगी? अगर किसी दृष्टी से पेहलू खान व उनके परिवारजनो ने कानून का उल्लंघन किया तो पुलिस को विद्यी अनुरूप कार्यवाही करनी थी। यह हक गौरक्षक के नाम पर गुण्डों के हवाले क्यों कर दी गई।
  • क्या गृहमंत्री का हत्यारो द्वारा किये गयेे काम को महिमा मण्डित करना शर्मनाक नहीं है। क्या इसे सरकार द्वारा प्रायोजित व समर्थीत काण्ड नहीं माना जायेगा।
  • एस.एच.ओ. बेहरोड व पुलिस अधिक्षक अलवर की भूमिका सीधी सीधी हत्यारों के समर्थन और अब बचाने में लगी हुई है। पेहलू खान व उसके परिवार के विरूद्ध लिखी गई एफ.आई.आर. उनके ऊपर पुलिस व राज्य द्वारा अत्याचार नहीं माना जायेगा।
  • जब पीट पीट कर मारा गया पेहलू खान, जिसका गवाह पोस्टमाॅर्टम रपट है, उसे भारतीय जनता पार्टी के विधायक ज्ञानदेव आहूजा साधारण रक्तचाप कह कर गौरक्षक बनाम हत्यारो के कृत्य को हल्का कर रहे है, क्या यह भी सीधा सीधा अपराधियों का समर्थन नहीं है।

हम मांग करते हैं -

  • हमलावरों गौरक्षको को तुरन्त गिरफ्तार किया जाये व उन पर हत्या का मुकदमा चलाया जाये |
  • साथ ही एस.एच.ओ. बहरोड़ के निलम्बन व पुलिस अधिक्षक अलवर को हटाया जाये।
  • गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया के द्वारा पेहलु खान के हत्यारों को बेधडक समर्थन के विरोध में नैतिकता के आधार पर इस्तिफा लिया जाये।
  • राजस्थान सरकार द्वारा पेहलू खान के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा देना चाहिए। क्योकि सरकार उनके जीवन की रक्षा नहीं कर पाई।
  • अजमत खान को उनके घर के पास गुडगांव में अच्छे अस्पताल में भर्ती करवाया जाये।
  • सभी घायलों को 10-10 लाख का मुआवजे की मांग करते है।
  • पेहलू खान व उनके साथीयों क¢ विरूद्ध में दर्ज की गई एफ.आई.आर. क¨ तुरन्तबन्द की जाए।

महोदया,

राजस्थान में यह गौरक्षको के नाम पर गुण्डागर्दी बढती जा रही है। पेहलू खान की हत्या दूसरी हत्या हैं। याद करे कि 30 मई 2015 को अब्दुल गफ्फार खान की हत्या खीमसर तहसील, नागौर जिले में की गई थी। आपको याद होगा कि नगर पालिका के ठेकेदार ने खीमसर तहसील के कुम्हरी गांव के एक खाली जमीन पर 200 गायों के कंकाल डाले थे और इस पर इन कथिक गौरक्षकों ने अफवाह फैलाई कि मुसलमानों ने 200 गायों को मार कर सेवन किया है। जिससे बिरलोका गांव के सब्जी बेचने वाले अब्दुल गफ्फार कुरेशी को कथित गोरक्षकों की भीड ने पकडकर मार डाला। आये दिन गौ तस्करी के नाम पर गरीब किसान द्वारा दूधारू गायों के वैद्य बेचान व खरीदने वाले गौपालको व परिवहक को परेशान, मारपीट, ट्रको जला देना, गाय व बछडो को उठा ले जाना व किसान जो खरीद कर रहा उसे जेल में भेजना आम बात हो चूकी है और तो और 19 मार्च को हुये होटल हैयात रब्बानी पर हमले में गौ माता को बीफ खिलाना होटल मालिक व उसके कर्मचारीयों के मथे मड दिया गया। अभी पुलिस रपट नहीं लिखी गई, ना कोई जांच हुई और जयपुर नगर निगम के महापौर अ’ाोक लाहोटी ने बीफ होने का प्रमाण मान लिया और होटल को रात के 11 बजे बन्द करवा दिया। यह एक अच्छे चलते होटल को बन्द करने की साजि’ा के अलावा कुछ भी नहीं था।

देश में सबसे ज्यादा गौवंश, भेड-बकरी, ऊँट राजस्थान में ही पाये जाते हैै। पशु मेले अनन्तकाल से चले आ रहे जहां किसान अपने द्वारा पाले गये जानवर को बेचने आते है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था इन पशु मेलो मे खरीद-फरोख व पशुओं के लालन-पालन पर निर्भर है। जिस तरह के हमले कथित गौरक्षको द्वारा बेचने व खरीदने वाले किसानों पर खासतोर पर जब वह मुसलमान हो पर किये जा रहे है, इससे प्रदेश के किसानों के साथ धोखा धडी है व अर्थव्यवस्था पर करारी चोट की जा रही है।

अगर आप इस स्थिति में शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करेंगी तो प्रदेश में गुण्डागर्दी बढती जायेगी, अर्थव्यवस्था पर कुठाराघात की घटनाऐं भी बढेंगी और मुसलमान काॅम के विरूद्ध बनाया जा रहा माहोल से प्रदेश में अमन व चैन खत्म होगा। आपसे अपील है कि आप उपरोक्त ज्ञापन को स्वीकारे व तुरन्त प्रभाव से लागू करे।

हम हैं,

कविता श्रीवास्तव (अध्यक्षा), अनन्त भटनागर (महासचिव), डी.एल. त्रिपाठी, अरूणा राॅय, निशात हुसैन, भँवर मेघवंश, राधाकान्त सक्सेना, सवाई सिंह, ममता जैटली, रमेश नन्दवाना (उपाध्यक्ष), कैलाश मीणा, हरकेश बुगालिया, पी.आर. शर्मा, कपिल सांखला व डाॅ. मीता सिंह।

Address for Correspondence: 76, Shanti Niketan Colony, Kisan Marg, Jaipur -302015
Phone : 9351562965, 9887158183, 0141-2708917 E-mail : pucl.rajasthan[at]gmail.com
 
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Bhanwar Lal Kumawat (Pappu)
(Office Secretary) PUCL, Rajasthan
Ph : 09887158183, 0141-2708917(O)
Fax : 0141-2704262
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